कैलाश दासजीसंग हमर पहिल भेट जनकपुर टुडेमे भेल छल । ओहि समय हम टुडेमे काज करैत छलहुँ । ओ कम्प्युटर टाइप करैत रहथि । टुडेमे टाइप करएवला छोडि़ देने छल आ ओहि स्थानपर कैलाशजी आएल रहथि । समाचार टाइप करावएकेँ जिम्मेवारी हमरे छल, तँए हुनकासंग बेसी समय हमर बितैत छल ।
टुडे छोड़लाक बादो हमरसभसंग मित्रवत व्यवहार बनले रहल । ओ मृदुभाषी रहथि टुडेमे रहैतकाल हुनक इएह पक्ष, हमरा प्रभावित कएने छल । मुदा किछु वर्षक बाद एकाएक हुनकासंग जनकपुरधामक त्रिदेव प्रेसमे भेट भेल । आसमान नेपाल एकटा म्यागजिन निकालने छल । एकटा अंकक सम्पादक जिम्मेवारी हमरा देने छल । जखन ओ पत्रिकाक डिजाइन करावए पहुँचलहुँ तँ आश्चर्य लागल ततबे फास्ट टाइप आ तेहने सुन्दर डिजाइन हुनक ई खूबी देखि हम दंग रहि गेलहुँ ।
जखन रेडियो मिथिलाक व्यवस्थापक मिथिला डटकम नामसँ पत्रिका निकालि रहल छल ओहि समय हमरा एकटा पत्रिका डिजाइनर चाहैत छल हम कैलाशजीकेँ आग्रह कएलहुँ अहाँ ई जिम्मेवारी लऽ लिअ ? मुदा ओ जनकपुर एक्सप्रेस पत्रिकामे रहथि । ओतए छोड़ब आसान नहि छल एकरबादो शुरुक दिनमे ओ पत्रिकामे आबि घण्टो निःशुल्क सहयोग कऽ देलन्हि । बादमे मिथिला डटकमकेँ किछु वर्ष डिजाइन सेहो कएलन्हि ।
ओहिक्रममे ओ नियमित समाचार लिखए लगलथि । घटनाक्रम एहन बनलैक जे ओ डिजाइनरसंग एकटा नियमित लिखएवला पत्रकार सेहो भऽ गेलथि । बादमे डेली एकसप्रेसक सम्पादन सेहो करए लगलथि ओ फेर समाचार दैनिक नामसँ अपने पत्रिका सेहो निकालि लेलन्हि । जखन दूधमती साप्ताहिक हम निकाललहुँ तँ दर्ताक लेल कागजपत्रक ओरियानसँ लऽ कऽ डिजाइनमे सेहो सहयोग कएलन्हि । एकठा बात बीना लाइलपटाइकेँ कहि सकैत छी जहिआ(जहिआ हमरा आवश्यकता पड़ल, हुनका खोजलहुँ एकटा छोट भाइ जकाँ चलि अबैत छलथि ।
जखन ओ मिडिया काउन्सिलक कार्यबाहक अध्यक्ष बनि कऽ एलथि, हुनका आओर नजदिकसँ चिन्हलहुँ । हुनकामे कोनो अहम नहि ! जहिना पहिनहि भेटैत छलथि तकरा निरन्तरता बनल रहल ।
नेपालमे विना पत्रकारिताक पत्रकारक बिगबिगी अछि वा कहि ओहन जमातक संख्या बेसीरु । पत्रकारिता पेसाप्रति सभसँ बेसी चुनौती ओहनेसँ देखल गेल अछि, जे ‘पत्रकार’ कहैत छथि, मुदा पत्रकारिता नहि करैत छथि ।
पत्रकारिताकेँ देखाबएवला दाँत बनाकऽ राजनीति, दलाली आ सौदाबाजी करएवला अनेक अछि । तकरा पत्रकार कहए पडि़ रहल अछि । उद्देश्य, कार्यशैली आ स्वार्थक आधारमे विना पत्रकारिताक पत्रकारक कतेको ‘भेरियन्ट’ भेटैत अछि । कोनोमे पत्रकारिताक व्यवहार आ लक्षणा देखल जाइत अछि, मुदा उद्देश्य दोसर होइत अछि । कतेकमे गुण आ लक्षण कनिको नहि देखाइत अछि, मुदा गलामे सूचना विभागक ‘प्रेस कार्ड’ सँ गाडीधरिमे ‘प्रेस’ समेत प्रस्ट देखएकेँ भेटैत अछि ।
काउन्सिलमे अध्यक्ष भेलाक बादो कैलाशजी पत्रिका नियमित निकालैत रहलथि । मिडियाक दृष्टिसँ देखल जाए तँ बहुत अन्हरबिहारि आएल बहुतो पत्रिका बन्द भऽ गेल मुदा ओ पत्रिका निकालैत रहलथि । कैलाशजी लग राजनीतिमे सक्रिय होबएकेँ विकल्प भेलाक बादो ओ एकटा पत्रकारे रहब निर्णय कएलन्हि । ई काज कठिन छैक मुदा ओ कठिन बाट चुनलन्हि इएह हुनका दोसरसँ अलग बनबैत अछि ।
अन्तमे कनि पत्रकारिताक लेल सेहो । आइ पत्रकारिता नव रूपमे अछि, ‘डिजिटल जर्नालिजम’ । आबएवला समयमे कागजमे तँ पत्रपत्रिका नहिओ भेट सकैत अछि । मुदा पत्रकारिता तँ रहत, कारण सूचना, अभिप्रेरणा, समाजक विभिन्न तह आ तप्काबीचक अन्तरसम्बन्धक निरन्तरता आ एकीकरण तथा ज्ञानक पुस्तान्तरण आ मनोरञ्जनक लेल सशक्त पत्रकारिता चाही । अफवाह, बनावटी सूचना आ भ्रमसभक पेचकेँे परिवेशकेँ चिरए ज्ञान आ सीप भेल नैतिक सञ्चारकर्मीसभ आगाँ बढावएवला व्यावसायिक पत्रकारिताक आवश्यकता कृत्रिम बौद्धिकताक चरमोत्कर्षमे आओर बेसी हएत । ताहि कारणेँ कागजमे प्रस्तुत करएवला सूचना वा टिप्पणीक सामग्रीकेँ पत्रपत्रिका कहब तँ आबएवला कोनो समयमे पत्रपत्रिका नहिओ रहए सकैत अछि । सन् २००४ मे अमेरिकी पत्रकार फिलिप मेयर सन् २०४३ मे अमेरिकामे कागजमे छापएवला अखबारक अन्तिमप्रति छापएकेँ भविष्यवाणी कऽ देने छथि । आइकाल्हि जनकपुरधाम सहित देशक अन्य स्थानपर माटिपर राखि नहि पत्रिका बेचैत देखल जा रहल अछि आ नहि पत्रपत्रिकाक दोकानमे लाइनसँ टांगल देखाइत अछि ।
समय अनुसार पत्रकारिताक प्रविधिमे विकास हएत मुदा आइ तँ एखन प्रिन्टक पत्रिका बाँचल अछि आ समाचारपत्र दैनिक सभ निरन्तर निकलि रहल अछि । वार्षिकोत्सवपर शुभकामना देबही पड़तैक ।



